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सोमवार, अप्रैल 29

चलती ट्रेन में प्रसव करवाने वाली निशा चौधरी को सरकार की तरफ से पुरस्कार मिलना चाहिए।

 हजारों दीपक चाहिए आरती सजाने के लिए। हजारों बूंदें चाहिए समूद्र बनाने के लिए। हजारों फूल चाहिए माला बनाने के लिए। पर एक अकेली बहन ही काफी है किसी की जान बचाने के लिए।


बहन के हौसले को दाद देता हूँ मेरे पास शब्द नहीं है बहन निशा ने ऐसा कार्य किया हे कभी मिले मौका तो बहन जरूर मिलूँगा आपसे ऐसे नेक कार्य करते रहिए ओर अपनी शिक्षा की ताकत को दिखाते रहिए... शौर्य प्रताप उर्फ सवाई सिंह राजपुरोहित 

चलती ट्रेन में प्रसव करवाने वाली निशा चौधरी को सरकार की तरफ से पुरस्कार मिलना चाहिए। और इस प्रेरणादायक कहानी को पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित करना चाहिए जिससे और लोग भी प्रेरणा लें और ऐसा करने का प्रयास करें कोशिश कीजिए की दिशा भावना से आप जन सेवा के कार्य करिए आपका सेवा का फल हमेशा आपको मिलेगा टीम सुगना फाऊंडेशन

शनिवार, मार्च 9

जीवन में अन्याय को एक सीमा तक ही बर्दाश्त करना चाहिए

 कभी-कभी हम जीवन में सही होने के बावजूद हम गलत लोगों के सामने सिर झुका लेते हैं, तो यह हमारी महानता और संजीवनी शक्तियों का प्रमाण है साथ ही हम यह भी दर्शाते हैं हम सही रास्ते पर और अपने अंदर उदारता है, जिससे हम भले ही असहीमता (परेशानियों) का सामना कर रह है, लेकिन हम अधिकतम सहानुभूति और विश्वास को बनाए रखना मे प्राथमिक देते हैं लेकिन कई बार यह हमारे लिए और बड़ा सर दर्द बन जाता है हमें ऐसे लोगों और ऐसा करने का मौका भी दे रहे होते हैं जीवन में कभी ऐसे करना है तो एक सीमा तक दे ओर कोशिश करें ऐसे लोगों को सबक जरूर सीखना चाहिए ताकि भविष्य में यह और लोगों का जीवन ना खराब कर सके मैंने अपने करियर में ऐसे कई लोगों के साथ काम किया और कई बार चीजों को बर्दाश्त किया लेकिन एक सीमा के बाद मैं उनके विरोध आवाज उठाई और मुझे सफलता भी मिली क्योंकि सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता कई बार हम यह सोचकर प्रयास नहीं करते कि सामने वाला बहुत बड़े पद पर बैठा है यहीं से ही उनके अंदर यह हिम्मत पैदा हो जाती है कि यह छोटा व्यक्ति हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता लेकिन ऐसे लोगों को सबक सिखाना तब बेहद जरूरी हो जाता है जब उनका अन्याय हद से ज्यादा बढ़ने लग जाए। बिल्कुल उनके खिलाफ आवाज उठाएं फिर वह चाहे किसी भी बड़े पद पर क्यों ना हो आप उसकी परवाह मत कीजिए।

एक सामान्य चुनौती है जो बहुत से लोगों को अपने जीवन में अनुभव करनी पड़ती है। कुछ प्रमुख कारण जो मैने अपने जीवन में देखा है जो कि निम्न प्रकार है।

समय की आवश्यकता: कभी-कभी हम गलत लोगों के सामने सिर इसलिए झुका लेते हैं क्योंकि हमें अपने कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए समय की आवश्यकता (जरूरत) होती है।

सामाजिक दबाव: कभी-कभी हम गलत लोगों के सामने सिर झुकाते हैं क्योंकि हमें सामाजिक या परिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है। आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है

संबंधों की महत्वता: जब हमारे पास परिवारिक या सामाजिक रिश्ते होते हैं, अक्सर हम उनकी गलत चीजों को भी बर्दाश्त करते हैं क्योंकि हमें लगता है इससे हमारे संबंध और रिश्ते खराब हो जाएंगे ।

संयम और शांति: कई बार, हम गलत लोगों के साथ झगड़े और आपसी विवादों से बचने के लिए ऐसी चीजों को नजर अंदाज कर जाते हैं 

हालांकि, यह अभ्यास कई बार हमारे लिए बहुत नुकसानकारी होता है और हमें अपने सिद्धांतों (मूल्यों) और स्वाभिमान को समझने की जरूरत होती है। सही होने का मतलब हमेशा सच्चाई, न्याय, और समर्थन के साथ होता है। गलत लोगों के सामने सिर झुकाने की बजाय, हमें अपने सिद्धांतों और सत्य के लिए उठना चाहिए। और जीवन में ऐसे लोगों को सबक सिखाना चाहिए मैं जल्द ही एक ऐसी ही मुहिम पर काम करने वाला हूं जिसमें मुझे आप लोगों का विशेष सहयोग चाहिए होगा यह मेरे 9 साल के करियर को ध्यान में रखते हुए जिन बातों को मैं अनुभव किया उनको मैं यहां लिखा है।

विशेष नोट:- हो सकता है आपके विचार मेरे से थोड़े अलग या भिन्न हो। आप अपनी बात कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

आपका शौर्य प्रताप( सवाई) सिंह राजपुरोहित [SM सीरीज 4]

शुक्रवार, फ़रवरी 23

आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जीवन युगों-युगों तक ध्रुवतारे के समान भावी पीढ़ियों का पथ प्रदर्शित करता रहेगा।

दिवाकर उदय हुआ या अस्त क्या कहूं। 

 जैन धर्म में वर्तमान के वर्धमान कहे जाने वाले, सैंकड़ों आचार्य होते हुए भी आचार्य श्री के नाम से एक मात्र नाम जो जाना जाता हो ऐसे जैन धर्म की धुरी माने जाने वाले महा तपस्वी महा संत पूज्य आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज अपनी मध्यलोक की यात्रा पूर्ण कर संसार से विहार कर गए। महावीर के वंशज वो नही जो कुल गोत्र से उनकी पीढियां हों अपितु वो हैं जो चारित्र से उनके पथ पर चले उनके अनुगामी बने।

विद्यासागर जी महाराज ने एक आचार्य, योगी, चिंतक, दार्शनिक और समाजसेवी, इन सभी भूमिकाओं में समाज का मार्गदर्शन किया। वे बाहर से सहज, सरल और सौम्य थे, लेकिन अंतर्मन से वज्र के समान कठोर साधक थे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य व गरीबों के कल्याण के कार्यों से यह दिखाया कि कैसे मानवता की सेवा और सांस्कृतिक जागरण के कार्य एक साथ किये जा सकते हैं।

आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जीवन युगों-युगों तक ध्रुवतारे के समान भावी पीढ़ियों का पथ प्रदर्शित करता रहेगा। मैं उनके सभी अनुयायियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ.... शौर्य प्रताप उर्फ सवाई सिंह राजपुरोहित 

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सवाई सिंह को ब्लॉग श्री का खिताब मिला साहित्य शारदा मंच (उतराखंड से )